Success Tips for crisis management in Hindi

Success Tips for crisis management in Hindi

खतरे से निपटने की "पूरी तैयारी"

किसी भी आम स्थिति की तरह छोटे बिजनेस भी संकटों से अछूते नहीं हैं। समस्या तब हो जाती है, जब किसी भी छोटे-बड़े संकट के अचानक से आ धमकने पर वे इससे उबर नहीं पाते और लंबे समय तक कामकाज बंद कर देना एंटरप्रेन्योर की मजबूरी बन जाती है। 
अचानक से आ धमकने वाली स्थितियों से निपटने के लिए बड़े बिजनेस तो तैयार रहते हैं लेकिन असल समस्या पेश आती है छोटे बिजनेसेज के साथ। यहां कुछ एंप्लॉइज के बीमार पड़ जाने पर या इंटरनेट का कनेक्शन ही चले जाने भर से काम बाधित हो जाता है। ये बातें सुनने में छोटी लग सकती हैं लेकिन ऎसी कई घटनाएं छोटे बिजनेसेज के लिए इतनी नुकसानदायक साबित होती हैं कि बहुत बार उनका कस्टमर बेस भी छिटकने लगता है। यदि समय रहते छोटे बिजनेस कुछ खास उपाय करके चलें तो उनकी प्रोडक्टिविटी इन संकटों से प्रभावित नहीं होती।


क्या हैं खतरे
छोटे बिजनेसेज के क्राइसेस मैनेजमेंट का भी पहला चरण यही है कि आप संभावित खतरों का पता लगाएं। यह खतरा अचानक पावर बैकअप फेल हो जाने से लेकर मेन्युअल इन्वेंटरीज में आग लगने तक कुछ भी हो सकता है। सभी संभावित खतरों का अंदाजा आपको रहेगा, तो आप उनसे निपटने के लिए पहले से ही तैयार रह सकेंगे।


कैसे संभलेगी स्थिति...
क्राइसेस मैनेजमेंट का सबसे अहम चरण यही है। आपके सामने खतरों का पूरा ब्यौरा होगा तो आप समझ पाएंगे कि आपके काम में किस-किस तरह की दिक्कतें पेश आ सकती हैं। अब आपका काम यह योजना बनाना है कि इन दिक्कतों के पैदा होने पर कौन-कौन से कदम उठाएंगे ताकि नुकसान को कम किया जा सके और काम को बाधित होने से बचाया जा सके।


रखें अपना बैकअप
पिछले दिनों उत्तरी भारत में ग्रिड फेल हो जाने क ी वजह से बहुत से छोटे बिजनेसेज को काम बिल्कुल बंद कर देना पड़ा था। ऎसी स्थिति से बचने के लिए अपने पास बैकअप बनाकर रखें। इस बैकअप में पावर बैकअप के अलावा इन्वेंट्रीज काइलेक्ट्रॉनिक मैनेजमेंट भी शामिल हैं। बैकअप पड़ा होने पर काम बाधित नहीं होगा और आपके दिमाग में निश्चिंतता भी बनी रहेगी। 


इंश्योरेंस कराएं जरूर
आपके बिजनेस का साइज बेशक छोटा है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि इसे इंश्योरेंस की जरूरत नहीं है। आपके छोटे-बड़े उपकरणों, परिवहन के साधनों और ऑफिस आदि का इंश्योरेंस करवाकर रखें ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में आपके पास कम से कम इंश्योरेंस की राशि तो हो। इंश्योरेंस को एक जिम्मेदारी के अलावा, क्राइसेस मैनेजमेंट के एक स्टेप की ही तरह लें। इससे फायदा आपका ही है। अगर आप इंश्योरेंस नहीं करवाएं तो आपको बाद में बड़ा नुकसान भी हो सकता है। 


कर लें मॉक ड्रिल
सरकारी प्रतिष्ठानों और बड़े बिजनेसेज में डिजास्टर मैनेजमेंट की अपनी तैयारी को परखने के लिए मॉक ड्रिल्स का आयोजन किया जाता है। इन मॉक ड्रिल्स का आयोजन आप भी कर सकते हैं। यहां आपका उद्देश्य अपने तमाम बैकअप्स की उपयोगिता जांचना है। इसके लिए आप अचानक से सारे ऑफिस क ी पॉवर सप्लाई या अन्य सुविधाओं को बाधित कर सकते हैं। यह अभ्यास आपको मुश्किल समय के लिए तैयार करता है।

Success Tips in Hindi on Office and Success

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